'है किसी के पास कुछ नया आईडिया?', प्रोडक्ट मेनेजर ने अपनी डिजाईन टीम को तौलते हुए पूछा। 'पिछले सात सालों में कोई नया आईडिया तो आपने दिया नहीं, आज की मीटिंग में क्या नया हो सकता है?'
'सर, मेरा एक आईडिया है अपने टूथब्रुश लाइन के लिए, जो कि बिलकुल नया है, और आपको जरूर पसंद आएगा': सुधांशु जी बोले।
'कहिये'..मेनेजर साहब ने अविश्वास से उन्हें देखा।
'सर, सोचिये, एक ऐसा टूथब्रुश जिसमे पेस्ट भी साथ में हो। और जिभ्ही भी साथ में हो। फिर तो यह तीनो अलग अलग लेकर चलने कि कोई जरूरत नहीं। फिर प्रोडक्ट के नए लाइन बनाना कितना आसान? टूथ पेस्ट रेफिल्ल्स अलग से बेचेंगे, अलग अलग किस्म के, नीम, आंवला, मिंट वगैरह। बड़ा रिफिल पैक जो महीना भर चले। छोटा जो हफ्ता भर।
"वाह, आपने तो सचमुच काफी बढिया विचार दिया है? टॉप मैनेजमेंट को यह जरूर पसंद आएगा।" मेनेजर जोश में बोले। "आपलोग इसका कोई नाम सजेस्ट करें।" कहकर उन्होंने उम्मीद से बाकी टीम को देखा।
"आल इन वन ", "दन्त रक्षक" वगैरह नाम आने लगे।
तभी मेंरे बगल में बैठे चौबे जी बोले " सर, क्यों न हम इसे दातुन कहें?
सुधांशु जी अगले हफ्ते भर चौबे जी से रूठे रहे।
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