Sunday, 16 November 2008

मुकेश के गीत

अभी कमरे में मुकेश की आवाज गूँज रही है ...'वक्त करता जो वफ़ा आप हमारे होते ॥' । काफी दिनों के बाद एक पुरानी डिस्क में कुछ पुराने गाने मिले, जो बजा रहा हूँ। मुकेश की आवाज मुझे हमेशा खींच कर बारहवीं के दिनों की ओर ले जाती है जब मुझे मुकेश को गौर से सुनने का मौका मिला था।
मुकेश के सबसे पहले फ़ैन मेरे चिंटू भगना थे। वैसे तो वे उम्र में मुझसे आठ दस साल बड़े होंगे लेकिन दीदी के बेटे होने के कारण भगना बोलने का हक मेरा था। आरा की वह रात मुझे अब भी याद है जब क्वार्टर की छत पर लेटकर हम दोनों रेडियो सुन रहे थे, मुकेश के गीत आ रहे थे और चिंटू जी काफी दुखी थे, उस दिन राज कपूर ने कहा था, मेरी आवाज चली गई ....
मुकेश के गाने मैं विनय भइया और भाभी से भी सुनता था बचपन के दिनों में। लेकिन इंटर में आने के बाद जब निशांत से मुकेश के गीत सुने तो दिल को छू गए। तब जा कर यह भी पता चला की सिवाय नाक से गाने के, सुर की पैठ और समझ भी मुकेश के गीतों को चाहने के लिए जरूरी है। यह वही उम्र थी जब अच्छे गानों के पीछे कैसेट दूकानों की खाक छानना अच्छा लगता था। निशांत के पास तो मुकेश के गानों का जैसे खजाना भरा था, ऐसे गाने जो शायद मैंने ढंग से कभी सुने भी नहीं, अब अच्छे लगने लगे।
अभी भी मुकेश के गीत फ़िर पुराने दिनों में ले जाते हैं। यहाँ लन्दन में बैठकर, ठण्ड के रात में, जब 'जिस गली में तेरा घर ...' बजना शुरू होता है, मैं फ़िर पहुँच जाता हूँ, उन्ही पुराने दिनों में, उम्र की चादर उड़ जाती है, और दिल फ़िर पच्चीस साल पीछे पहुँच जाता है, उन्ही पुरानी गलियों में, उन्ही पुरानी यादो में ।

मुकेश के कुछ गीत जो मेरे प्रिय हैं:
१। कई बार यूँ भी देखा है (रजनी गंधा)
२। जाने कहाँ गए वोह दिन ( मेरा नाम जोकर)
३। तुम अगर मुझको न चाहो ( याद नहीं, आप सहायता करें ...)
४। रात और दिन दिया जले
५। जिस गली में तेरा घर

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